संदेश

प्रिय छात्र/छात्राओं,

ज्ञान का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक और अचिन्त्य है। अनन्त अन्तरिक्ष के समान ज्ञान के भी  ओर और छोर का पता नहीं है। ज्ञान के विषयों की कोई सीमा नहीं है। मनुष्य के समक्ष ज्ञान का अगाध सागर लहरा रहा है। जिसका जितना सामर्थ्य है, वह उसमें से उतना उलीच लेता है। ज्ञान प्राणिमात्र का विषय है किन्तु मनुष्य समझता है कि सबसे अधिक बुद्धिमान् और ज्ञानी वह ही हैं। इसी कारण वह सदैव सीखने का प्रयत्न करता है और अपने ज्ञान की परिधि का विस्तार करता रहता है।

यह सच है कि कोई भी मनुष्य ‘सर्वज्ञ’ नहीं हो सकता किन्तु ‘बहुज्ञ’ तो हो ही सकता है और होता भी है। हाँ, उसमें समझ की प्रौढ़ता और रुचि का निखार होना चाहिए। अपनी बढ़ी हुई समझ और रुचि की विविधता के कारण कभी-कभी बच्चे, ज्ञान के क्षेत्र में अपने बड़े बूढ़ों से आगे निकल जाते हैं। अध्ययन और जिज्ञासा विद्यार्थी का प्रथम कर्तव्य होना चाहिये, विद्यार्थी को अपने अध्ययन काल में सुख सुविधाओं तथा व्यसन का त्याग करना पड़ता है। तभी उसमें महान व्यक्तित्व का जन्म होता है, यदि आपको पृथ्वी के सभी सुख प्राप्त करने है, तो विद्यार्थी जीवन में कष्टों को गले लगाना होगा। कड़ी मेहनत एवं एकाग्रता आपके जीवन को सफलता की ओर ले जायेगी।ज्ञान का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक और अचिन्त्य है। अनन्त अन्तरिक्ष के समान ज्ञान के भा और-छोर का पता नहीं है। ज्ञान के विषयों की कोई सीमा नहीं है। मनुष्य के समक्ष ज्ञान का अगाध सागर लहरा रहा है। जिसका जितना सामर्थ्य है, वह उसमें से उतना उलीच लेता है। ज्ञान प्राणिमात्र का विषय है किन्तु मनुष्य समझता है कि सबसे अधिक बुद्धिमान् और ज्ञानी वह ही हैं। इसी कारण वह सदैव सीखने का प्रयत्न करता है और अपने ज्ञान की परिधि का विस्तार करता रहता है।

यह सच है कि कोई भी मनुष्य ‘सर्वज्ञ’ नहीं हो सकता किन्तु ‘बहुज्ञ’ तो हो ही सकता है और होता भी है। हाँ, उसमें समझ की प्रौढ़ता और रुचि का निखार होना चाहिए। अपनी बढ़ी हुई समझ और रुचि की विविधता के कारण कभी-कभी बच्चे, ज्ञान के क्षेत्र में अपने बड़े बूढ़ों से आगे निकल जाते हैं। अध्ययन और जिज्ञासा विद्यार्थी का प्रथम कर्तव्य होना चाहिये, विद्यार्थी को अपने अध्ययन काल में सुख सुविधाओं तथा व्यसन का त्याग करना पड़ता है। तभी उसमें महान व्यक्तित्व का जन्म होता है, यदि आपको पृथ्वी के सभी सुख प्राप्त करने है, तो विद्यार्थी जीवन में कष्टों को गले लगाना होगा। कड़ी मेहनत एवं एकाग्रता आपके जीवन को सफलता की ओर ले जायेगी।.    विगत दो वर्ष में विश्व ने शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी को देखा है कोविड ने पूरी दुनिया एवं भारत को अपने आगोश में ले लिया था, हमने अपनों को खोया आर्थिक संकट, सामाजिक दूरियों को देखा अब हम सब वापस इस नयी परिस्थितियों से समायोजन बना रहे हैं परन्तु इस घटना से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला इस सीख को अपने जीवन में याद रखने की जरुरत है।

इस वर्ष हम भारत की नवीन राष्ट्रीय शिक्षानीति 2020 के तहत शिक्षा के इस नये कलेवर के साथ स्वतंत्रता की 75वीं  वर्षगांठ मना रहे हैं, नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का शैक्षणिक ढांचा 5+3+3+4 बनया गया है जिसमें शिक्षा के साथ ही सामाजिक विकास कौशल विकास, स्वभाषा विकास ज्ञान एवं रोजगार परक शिक्षा को प्राथमिकता दी गयी है इसमें परम्परागत शिक्षा के बजाय स्वतंत्र शिक्षा एवं वैश्विक स्तर पर उपलब्ध ज्ञान को हम तक पहुचाने का प्रयास किया गया है।

इस महाविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण, सुरम्य परिवेश, योग्य अध्यापक, खेल, योगा, कौशल तकनीकी विकास, शोध एवं अन्य गतिविधियों के साथ आप विद्यार्थियों को अपने सुनहरे भविष्य को सवारने की हर सुविधा मौजूद है।

मैं आप सबसे यह आशा करता हूँ कि यहाँ से आप ज्ञान प्राप्त करके देश एवं विदेश में महाविद्यालय का नाम रोशन करेगे और ज्ञान के नये आयाम स्थापित करेगें।

शुभकामनाओं के साथ

आपका

                                                   डॉ अभिमन्यु यादव

                                                           प्राचार्य

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